Sunday, December 14, 2014

Kakhan Harab Dukh Mor



Kakhan Harab Dukh Mor [ Singer : Rajni Pallavi ]
A Maithili Vidyapati's Geet
The song "Kakhan Harab Dukh Mor" is penned by great Maithili poet Mahakavi Vidyapati. This song doesn't need any introduction of its own as it has been one of the most celebrated songs in Mithila, representing strong belief and cult followership of lord Shiva in Maithili society. If you like this song, please do share it with your family and friends. I will count this favor as best reward for my effort.
Regards
Rajni Pallavi

"हे भोलानाथ, कखन हरब दुःख मोर" महाकवि विद्यापति द्वारा लिखल गीत श्रोतागणक सेवा मे प्रस्तुत कय रहल छी | हम भरिसक प्रयास कएल अछि जे अपने लोकनि क' गीत सुनय मे नीक लागय | गीत मे सुन्दर ढंग सं वाद्य यन्त्र क' उपयोग कएल अछि | आशा अछि अपने लोकनि क' गीत पसंद होय | श्रोतागण सं अपेक्षा अछि जे जों अपने लोकनि क' गीत पसंद होए त' गीत क' शेयर जरुर करी | शुभकामनाक संग
रजनी पल्लवी

भावार्थ 
हे भोलानाथ ! हमरा एहि दुःख सं कखन छुटकारा देब । हमर दुखे मे जनम भेल आ ई जीबन दुखे मे बितल । सुख त' सपनों मे कहियो नहि भेल । हे भोलानाथ, अछत, चानन ओ गंगाजल, बेलपात सं तोहर हम पूजा अर्चना करब । एहि संसार--सागर क' कोनो थाह नहि छैक, हे शिव, हम एहि दुखक अथाह सागर मे डूबि रहल छी, अहाँ हमर डेन ध' लिअ । विद्यापति कहैत छथि अहाँक बिना हमर कोनों गति नहि अछि । हमरा अभयवर प्रदान करू ।

Jayati Saraswati Vidya Dayani



Jayati Saraswati Vidya Dayani [ Singer : Rajni Pallavi ]
Poet - Shree Bhimnath Jha

सरस्वती वन्दना

जयति सरस्वती विद्यादायिनि
विनित निखिल संसार
हे माँ करू, वीणा झंकार |


जग मे जतय जहाँ अछि प्राणी, सभ मे अहीं भरै छी वाणी
केहनो सुन्दर रहओ, किन्तु-विनु बोल बौक बेकार
हे माँ करू, वीणा झंकार |


अहींक प्रतापे हे ब्रह्माणी, बनल सकल छथि पंडित ज्ञानी
जै पर दी कंडेरी, फेर नहि, आबय ततय अन्हार
हे माँ करू, वीणा झंकार |


अज्ञानक अन्हार हरु माँ, सभ मे ज्ञान प्रकाश भरु माँ
शरणागत अछि भीम चरण रज, दया करू माँ उद्धार
हे माँ करू, वीणा झंकार |


Aye Mohabbat Tere Anjam Pe Rona Aaya



Aye Mohabbat Tere Anjam Pe Rona Aaya [ Singer : Rajni Pallavi ]
Poet: Shakeel Badayuni
Aye Mohabbat Tere Anjaam Pe Rona Aaya
Jaane Kyon Aaj Tere Naam Pe Rona Aaya
Yun Toh Har Shaam Ummidon Mein Guzar Jaati Hai
Aaj Kuch Baat Hai Jo Shaam Pe Rona Aaya
Kabhi Taqdeer Ka Matam Kabhi Duniya Ka Gila
Manzil-e-Ishq Mein Har Gam Pe Rona Aaya
Jab Hua Zikra Zamane Mein Mohabbat Ka Shakeel
Mujh Ko Apane Dil-e-Nakaam Pe Rona Aaya


Bar Sukh Saar



Bar Sukh Saar [ Singer : Rajni Pallavi ]
सुधि श्रोतागण, अपने लोकनिक समक्ष महाकवि विद्यापतिक अंतिम गीत प्रस्तुत क' रहल छी । "गंगा स्तुति" महाकविक अंतिम रचना छनि । "बर सुख सार पाओल तुअ तीरे", मिथिलाक जन जन मे लोक प्रिय अछि । गंगा स्तुति महाकवि गंगाक तट पर कल्पवास करबाक अपन अंतिम समय मे रचना केलनि । एहि गीतक रचनाक बर कथा सुनल जाइत छैक मुदा महाकविक लिखल पद प्रामाणिक छैक -
सपना देखल हम सिव सिंह भूप, बतीस बरख पर सामर रूप । बहुत देखल गुरुजन प्राचीन, आब भेलहुँ हम आयु विहीन । समटु समटु नीज लोचन नीर, ककरहु काल न राखथि थीर । विद्यापति सुगतिक प्रस्ताव, त्याग कए करुणा रसक स्वभाव ।
अर्थात बतीस बरख पर राजा सिव सिंहक श्यामल रूप हम सपना में देखल । बहुत अपन पुरखा आ गुरुजन सभ क' सेहो देखलौ । आहाँ सभ कियैक कनैत छी, अपन अपन नोर क' रोकू, केकरो काल स्थिर रखैत छैक? विद्यापति कहैत छथि जे ई त' सुन्दर गति भेटबाक प्रस्ताव थीक । तैं आहाँ लोकनि एहि शोकक परित्याग करैत जाउ ।
महाकवि क'अंतिम समय मे ज्ञान भ' गेलनि तैं ओ गंगाक पवित्र तट पर कल्पवास करय पहुँचलाह आ शरीर त्याग करबा सं पहिने गंगा स्तुतिक रचना केलनि ।
भवार्थ हे माँ गंगे, अहाँक तट पर बर सुख भेटल । मुदा आइ संग छोरैत आँखि सं अविरल नोर खसि रहल अछि । हम क'ल जोरि अहाँक प्रणाम करैत छी हे विमल तरंग बाली माँ गंगे । हमर इच्छा अछि जे संग छुटलाक बादो अहाँक दर्शन होयत रहय । हँ, हमरा सं एकटा अपराध भ' गेल अछि, तेकरा क्षमा क' देब माँ । हमर पायर अहांक जलक स्पर्श केलक अछि । हम जप तप, जोग ध्यान की करब, जीबन सुफल भ' जाइत मात्र एकहि स्नान सं । विद्यापति कहैत छथि जे हे माँ गंगे! आइ जायत काल हम बिछोहक पद अर्थात समदाउन सूना रहल छी जे जीबनक एहि अंत काल मे बिसरि नहि जायब ।
विद्यापतिक ई अंतिम गीत छनि । एकर बाद ओ परमधाम चलि गेलाह । ओ अपने लिखने छथि, "विद्यापति आयु अवसान, कार्तिक धवल त्रयोदसि जान ।" सुधि पाठक एबं श्रोतागण सं निवेदन, एहि गीतक रसस्वादन क' हमरो अपन मत लिखि पठाबी जाहि सं अगर कोनो त्रुटि हेतैक त' ओहि क' निवारण कएल जा सकैक । रजनी पल्लवी

Sunday, November 25, 2012

Maithil Chhi Mithila Baas Hamar



‪Maithil Chhi Mithila Baas Hamar [ Singer : Rajni Pallavi ]
िमथिलाक विभुित गौतम, याग्यवल्क, गागीॅ जनक आदिक पािण्डत्यपूणॅ वचन आदि काल सॅ॑ विद्यमान छैक। िमथिलाक मदन, ग॑गेश, गोकुलनाथ, रघुनाथ उपाध्याय सॅ॑ लोकनि शिच्छादानी छलाह। गॅ॑गेश उपाध्याय सॅ॑ स्वम वृहस्पितक पूत्र कच न्याय पढ़य आयल रहथि।
िमथिलाक नाम विदेह, तिरहुत, ितरभुिक्त सेहो छैक। सीताक नाम वैदेही मैिथली सेहो रहनि जिनकर जन्म भू-पृथ्वी सॅ॓ भेल छलनि। िशवजीक धनुष राजा जनक के घर मे॑ रहनि जेकरा कोनो राजा नहि उठा सकल मुदा वैदेही-सीता नित्य वामा हाथ सॅ॑॑ उठाकय धनुषक स्थानक निपिया अपना हाथे करैत छलीह
मिथिलाक महान कवी विद्यापति जनिक जन्म कार्तिक धवल त्रयोदशी-१३६४ ई॰ मे मधुबनी जिलान्तर्गत विस्फी गॅ॑ाव मे भेल छलनि । म॑डन-भारती, वाचस्पति, नैनन, बवुजन, कैलाश, चुम्मन आदि न्याय, मिभासा, वैदान्तक मिथिलाक मर्मग्य विद्वान छलाह ।
रॅ॑ाटी-मॅ॑गरौनी-पिलखबार के केन्द्र बिन्दू मानि ५ कोसक त्रिज्या लय जे वृताकार छेत्र होयतैक, मिथिलाक प॑चक्रोसी कहबैत छैक । मिथिलाक सा॑स्कृतिक केन्द्र बिन्दु वैह छैक। आधुिनक भारतक सॅ॑िवधान मे हिन्दू-कोड एकटक विभिन्न धारा उदधृत करबा मे मैथिल विद्वानक सराहनीय योगदान छनि ।

Ke Patiya Lay Jayat Re



‪Ke Patiya Lay Jayat Re [ Singer : Rajni Pallavi ]
A maithili Vidyapati's geet

Damarua He Gaura La Gel Chor



‪Damarua He Gaura La Gel Chor [ Singer : Rajni Pallavi ]
This maithili geet was previously recorded by Smt. Sharda Sinha.